मंदिर पूजन-अर्चन योजना, श्री वेद विद्या सेवाश्रम ट्रस्ट की एक महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सामाजिक पहल है। इस योजना का उद्देश्य ग्राम स्तर पर मंदिरों में नियमित पूजा-अर्चना की पुनः स्थापना कर, समाज में धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ करना है।
योजना के उद्देश्य
-
ग्राम मंदिरों में नित्य पूजन-अर्चन की पुनः स्थापना
-
गुरुकुल के शिवार्चन एवं गंगा आरती कार्यक्रमों का ग्राम स्तर तक विस्तार
-
पूजा-अर्चना के माध्यम से ग्राम एकता एवं धर्म संरक्षण
-
मंदिरों का जीर्णोद्धार एवं संरक्षण
प्रमुख गतिविधियाँ (भाग – 1)
-
नित्य पूजन-अर्चन
-
दीप प्रज्वलन
-
आरती
-
मंत्र-पाठ
-
भजन
-
-
साप्ताहिक / मासिक कार्यक्रम
-
हनुमान चालीसा पाठ एवं जप
-
रुद्राभिषेक
-
गीता पाठ / रामायण पाठ
-
भजन संध्या
-
प्रमुख गतिविधियाँ (भाग – 2)
-
गुरुकुल सहभागिता
-
बटुकों द्वारा वेद मंत्र, स्तोत्र एवं शिवार्चन
-
-
समिति निर्माण
-
प्रत्येक ग्राम में “मंदिर सेवा समिति” का गठन
-
-
संस्कार केंद्र
-
संस्कृत संभाषण
-
योगाभ्यास
-
बाल-संस्कार शिविर
-
धार्मिक एवं सामाजिक महत्व
-
ग्राम मंदिरों में पुनः धार्मिक वातावरण की स्थापना
-
ग्रामीण समाज में सांस्कृतिक चेतना एवं एकता
-
गुरुकुल एवं ग्राम समाज के बीच मजबूत आध्यात्मिक संबंध
-
आने वाली पीढ़ी में संस्कृति एवं धर्म का संरक्षण
अपेक्षित लाभ
-
ग्राम मंदिरों में नियमित धार्मिक गतिविधियाँ
-
ग्रामीणों में धर्म एवं संस्कृति के प्रति जागरूकता
-
सामाजिक समरसता एवं सहभागिता
-
संस्कारयुक्त समाज का निर्माण
ट्रस्ट की प्रमुख परियोजनाओं में स्थान
मंदिर पूजन-अर्चन योजना ट्रस्ट की प्रमुख परियोजनाओं में से एक है, जिसके माध्यम से सनातन संस्कृति और ग्राम्य धार्मिक जीवन को सशक्त किया जा रहा है।